Dhyan

सिफली इल्म में भूत प्रेत विद्या

admin 26 Jun 2023 1 min read 6,789

सिफली इल्म को निम्न occult विद्या कहा जाता है। इसमें पृथ्वी और निचली योनियों से संबंधित ज्ञान आता है। भूत-प्रेत विद्या इसी का एक प्रमुख अंग मानी जाती है।

भूत-प्रेत विद्या का स्थान

सिफली इल्म में भूत, प्रेत, पिशाच, जिन्न और अन्य निचली योनियों को साधने, बुलाने, वश में करने या उनसे कार्य कराने की विद्या को महत्व दिया गया है।

यहाँ इन योनियों को:

  • अधूरी मृत्यु वाले जीव
  • तीव्र इच्छाओं वाले सूक्ष्म शरीर
  • पृथ्वी तत्व से जुड़े हुए अदृश्य प्राणी

माना जाता है। साधक इनसे लौकिक फल — सुरक्षा, नुकसान पहुँचाना, सूचना देना, वशीकरण आदि — प्राप्त करने का प्रयास करता है।

मुख्य धारणाएँ

सिफली परंपरा में कुछ प्रमुख बातें कही जाती हैं:

  • हर भूत-प्रेत की एक प्रकृति और कमजोरी होती है।
  • उन्हें विशिष्ट मंत्र, यंत्र, बलि या अनुष्ठान से प्रभावित किया जा सकता है।
  • कुछ योनियाँ साधक की सेवा करती हैं, कुछ उल्टा नुकसान पहुँचाती हैं।
  • साधक की मानसिक शक्ति, संकल्प और सुरक्षा उपाय जितने मजबूत हों, उतना ही नियंत्रण संभव माना जाता है।

साधना के सामान्य रूप

परंपरा में निम्नलिखित प्रकार की विधियाँ बताई जाती हैं (केवल परिचय के लिए):

  • स्मशान साधना
  • अमावस्या की रात्रि में की जाने वाली साधनाएँ
  • विशिष्ट यंत्र और ताबीजों का प्रयोग
  • मंत्र जाप के साथ आह्वान
  • किसी माध्यम (person) के माध्यम से योनि से संवाद

इन सबका उद्देश्य आमतौर पर लौकिक होता है — प्रभाव generat करना, शत्रु पर दबाव बनाना, खोई वस्तु का पता लगाना, या सुरक्षा कवच तैयार करना।

उच्च तंत्र और सिफली इल्म में अंतर

उच्च तंत्र में भूत-प्रेत साधना को निम्न कोटि का माना गया है। वहाँ लक्ष्य मोक्ष, कुंडलिनी जागरण और अद्वैत होता है।

सिफली इल्म में लक्ष्य ज्यादातर:

  • भौतिक लाभ
  • शक्ति प्रदर्शन
  • दूसरों पर नियंत्रण
  • भय पैदा करना

होता है। इसलिए दोनों मार्गों की दिशा बिलकुल अलग है।

गंभीर खतरे और सावधानियाँ

भूत-प्रेत विद्या को सिफली इल्म का सबसे खतरनाक हिस्सा माना जाता है।

  • साधक अक्सर स्वयं प्रभावित हो जाता है।
  • मानसिक असंतुलन, भय, अवसाद, और व्यक्तित्व में परिवर्तन आम शिकायतें हैं।
  • अधूरे या गलत प्रयोग से उल्टा प्रभाव पड़ता है।
  • कई साधक जीवन भर इन योनियों से मुक्त नहीं हो पाते।
  • परिवार और आसपास के लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।

बिना योग्य गुरु, मजबूत मानसिक स्थिति और शुद्ध संकल्प के यह मार्ग अत्यंत जोखिम भरा है।

आधुनिक दृष्टि

आज के समय में ज्यादातर “भूत-प्रेत साधना” के दावे या तो मानसिक सुझाव होते हैं, या फिर व्यापार। असली स्तर की सिफली साधना बहुत कम लोगों के पास बची है, और जो है भी, वह आमतौर पर छुपाकर रखी जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से कई अनुभव मानसिक और भावनात्मक कारणों से भी उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए हर अनुभव को तुरंत योनि का प्रभाव मान लेना उचित नहीं।

निष्कर्ष

सिफली इल्म में भूत-प्रेत विद्या को निचली शक्तियों से जुड़ने का माध्यम माना गया है। यह तीव्र परिणाम दे सकती है, लेकिन इसकी कीमत भी उतनी ही भारी होती है।

जो व्यक्ति केवल शक्ति या बदला लेने के लोभ में इस ओर जाता है, वह अक्सर खुद को ही फँसा लेता है।

उच्च आध्यात्मिक मार्ग में इन योनियों से दूर रहने की सलाह दी गई है। क्योंकि जो साधक ऊपर की ओर जाता है, उसे नीचे की शक्तियों से खेलने की आवश्यकता नहीं रहती।

Comments (0)

Login to leave a comment.

No comments yet. Be the first.

Related Articles