Tantra

नूर-ए-तंत्र : रौशनी और ताक़त का संगम

admin 27 Jul 2023 1 min read 4,570

नूर-ए-तंत्र एक नया हम-आहंग रूहानी रास्ता है। इसमें तसव्वुफ़ और तंत्र को बराबर के तनासुब में मिलाया गया है। एक तरफ़ इश्क़, ज़िक्र और फ़ना है, तो दूसरी तरफ़ एनर्जी, चक्र, कुंडलिनी और इलाही मिलाप। दोनों धाराओं को जोड़कर एक ऐसा रास्ता बनाया गया है जो दिल और एनर्जी दोनों को एक साथ साधता है।

नूर-ए-तंत्र का मतलब

“नूर” का मतलब है रौशनी। “तंत्र” का मतलब है फैलना और तरीक़ा।

नूर-ए-तंत्र का मफ़हूम है — रौशनी की ताक़त से बातिनी वुसअत। यहाँ रौशनी सिर्फ़ ज़ाहिरी नहीं, बल्कि दिल का नूर और कुंडलिनी की तेज़ी दोनों है। जब दिल की मुहब्बत और जिस्म की एनर्जी एक हो जाती है, तब सालिक नूर-ए-तंत्र के रास्ते पर गामज़न होता है।

दो धाराओं का बराबर का इम्तिज़ाज

सूफ़ी अनासिर:

  • इश्क़ — तीव्र और बेग़रज़ मुहब्बत
  • ज़िक्र — लगातार याद और नाम का जाप
  • फ़ना — अनानियत का ख़ात्मा और मुकम्मल तस्लीम

तंत्र के अनासिर:

  • एनर्जी — प्राण और काम ताक़त का तबदीला
  • चक्र — सात एनर्जी मरकज़ों की तज़किया
  • कुंडलिनी — सोई हुई साँप ताक़त का बेदारी
  • इलाही मिलाप — मर्द-औरत एनर्जी का होशमंद इत्तेहाद (यब-युम का जज़्बा)

नूर-ए-तंत्र में इन दोनों को बराबर अहमियत दी गई है। सिर्फ़ मुहब्बत काफ़ी नहीं, एनर्जी भी ज़रूरी है। सिर्फ़ एनर्जी काफ़ी नहीं, मुहब्बत और तस्लीम भी ज़रूरी है।

बुनियादी उसूल

  1. दिल और एनर्जी एक हैं मुहब्बत दिल में जगती है, एनर्जी रीढ़ में। दोनों को जुदा नहीं किया जा सकता।
  2. फ़ना और बेदारी साथ-साथ अनानियत के मिटने के साथ-साथ कुंडलिनी का उठना। एक के बग़ैर दूसरा अधूरा।
  3. ज़िक्र और कंपन नाम का जाप सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि पूरे जिस्म के कंपन के साथ किया जाता है। ज़िक्र चक्रों को सरगर्म करता है।
  4. इश्क़ ही ताक़त है मुहब्बत को कमज़ोर जज़्बा नहीं माना गया। तीव्र इश्क़ ही कुंडलिनी को जगाने वाली आग है।
  5. इलाही मिलाप मर्द और औरत एनर्जी का मिलाप सिर्फ़ जिस्मानी नहीं, बल्कि नूर का लेन-देन है। इसमें होश और तस्लीम दोनों ज़रूरी हैं।

अमल का मुख़्तसर तरीक़ा

  • रोज़ाना ज़िक्र के साथ साँस और चक्र मुरक़बा
  • क़ल्ब में नूर की तसव्वुर
  • कुंडलिनी को मुहब्बत की आग से बेदार करना
  • जोड़े की साधना में यब-युम के जज़्बे से एनर्जी का ऊपर को ले जाना
  • फ़ना की हालत में क़ायम रहना

नूर-ए-तंत्र की ख़ासियत

यह रास्ता न तो पारंपरिक तसव्वुफ़ की पूरी नक़ल है और न ही शुद्ध तंत्र की। यह दोनों की ताक़तों को लेकर एक नया रास्ता बनाता है। यहाँ सालिक मुहब्बत में डूबता है और एनर्जी में बेदार होता है। दोनों हालतें एक साथ चलती हैं।

नूर-ए-तंत्र उन सालिकों के लिए है जो दिल की नर्मी और एनर्जी की शिद्दत दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं।

नतीजा

नूर-ए-तंत्र रौशनी और ताक़त का संगम है। इश्क़ से दिल खुलता है। ज़िक्र से नूर क़ायम होता है। फ़ना से अनानियत मिटती है। कुंडलिनी से शुऊर फैलता है। और इलाही मिलाप से वहदत का तजर्बा होता है।

यह रास्ता उन लोगों के लिए है जो मुहब्बत और एनर्जी दोनों को अपना दीन बनाना चाहते हैं।

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