Tantra

सिफली इल्म: इस्लामिक तंत्र?

admin 27 Jun 2020 1 min read 3,240

“सिफली इल्म” और “इस्लामिक तंत्र” — ये दोनों शब्द अक्सर एक साथ बोले जाते हैं। लोग पूछते हैं कि क्या सिफली इल्म इस्लाम का तंत्र है? इसका उत्तर सीधा नहीं है। सिफली इल्म को इस्लामी परंपरा का हिस्सा कहना गलत होगा, लेकिन यह मुस्लिम समाज में विकसित और प्रचलित अवश्य हुआ है। इसे “इस्लामिक तंत्र” कहना अधूरी और भ्रामक तुलना है।

सिफली इल्म क्या है?

सिफली इल्म का शाब्दिक अर्थ है — “निचली विद्या” या “निचला ज्ञान”। यह मुख्य रूप से दक्षिण एशिया (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश) में प्रचलित जादुई और ओझायी प्रथाओं का समूह है। इसमें शामिल हैं:

  • जिन्न और भूत-प्रेत से संबंधित कार्य
  • वशीकरण, ऊपरी, टोटके
  • ताबीज, गंडे, झाड़-फूंक
  • शत्रु नाश, मोहिन और प्रभाव डालने वाले प्रयोग
  • कब्रिस्तान और निर्जन स्थानों पर अनुष्ठान

ये प्रथाएँ अरबी, फारसी, उर्दू और स्थानीय भाषाओं के मिश्रण से बनी हैं। इनमें कभी-कभी कुरान की आयतें, अरबी मंत्र और इस्लामी प्रतीक भी इस्तेमाल होते हैं। इसी वजह से लोग इसे “इस्लामिक” कहने लगते हैं।

क्या यह इस्लाम का हिस्सा है?

नहीं। मुख्यधारा का इस्लाम (कुरान और हदीस के आधार पर) जादू-टोना, सिफली इल्म और जिन्न को वश में करने जैसी चीजों को हराम (निषिद्ध) मानता है। इस्लामी विद्वान इन्हें शिर्क (ईश्वर के साथ साझेदारी) और जादू की श्रेणी में रखते हैं।

जो लोग सिफली इल्म करते हैं, वे अक्सर इस्लामी शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं ताकि आम मुस्लिम समाज में स्वीकृति मिल सके। लेकिन मूल इस्लामी शिक्षाओं से इनका टकराव है।

सिफली इल्म और तंत्र में अंतर

पहलू तंत्र सिफली इल्म
मूल स्रोत हिंदू-बौद्ध तांत्रिक परंपरा लोक जादू + अरबी-फारसी प्रभाव
उद्देश्य जागरण, कुंडलिनी, मोक्ष सांसारिक लाभ, वशीकरण, हानि
शक्ति का स्रोत आंतरिक ऊर्जा, शिव-शक्ति जिन्न, आत्माएँ, निचली शक्तियाँ
नैतिकता शुद्ध भाव और सहमति पर जोर अक्सर स्वार्थ और प्रभाव प्रधान
धर्म से संबंध शैव-शाक्त दर्शन इस्लामी प्रतीकों का सतही उपयोग
परिणाम चेतना का विकास प्रायः मानसिक बोझ और उल्टा प्रभाव
 
 

तंत्र एक आध्यात्मिक मार्ग है। सिफली इल्म मुख्य रूप से जादुई और परिणामवादी विद्या है।

“इस्लामिक तंत्र” कहने की भ्रांति

लोग सिफली इल्म को इस्लामिक तंत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि:

  • इसमें अरबी मंत्र और कुरान की आयतों का प्रयोग होता है
  • जिन्न की अवधारणा इस्लामी ब्रह्मांड विज्ञान से ली गई है
  • मुस्लिम ओझा और आमिल इसे करते हैं
  • ताबीज और रूहानी इलाज के रूप में पेश किया जाता है

लेकिन यह तुलना गलत है। जिस तरह हिंदू समाज में भी काला जादू और टोटके हैं जिन्हें “तंत्र” कहना गलत है, उसी तरह सिफली इल्म को इस्लाम का तंत्र कहना गलत है।

सूफीवाद से अंतर

इस्लाम की रहस्यमय धारा सूफीवाद है। सूफी साधना प्रेम, जिक्र, फना और ईश्वर से एकत्व पर आधारित है। सिफली इल्म सूफीवाद नहीं है। सूफी संत जादू-टोना और निचली शक्तियों से दूर रहने की शिक्षा देते हैं।

निष्कर्ष

सिफली इल्म को “इस्लामिक तंत्र” कहना भ्रामक है। यह मुस्लिम समाज में प्रचलित निचली जादुई विद्या है, जो इस्लामी शब्दावली का इस्तेमाल तो करती है, लेकिन इस्लाम की मूल शिक्षाओं से मेल नहीं खाती।

तंत्र जहाँ साधक को ऊपर उठाता है, सिफली इल्म अक्सर उसे निचली शक्तियों और स्वार्थ से बाँधता है। दोनों को एक मानना न तो तंत्र के साथ न्याय है और न ही इस्लाम के साथ।

सही समझ यही है कि सिफली इल्म एक लोक-जादुई परंपरा है, न कि कोई प्रामाणिक आध्यात्मिक या धार्मिक मार्ग

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